मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार का फ्लोर टेस्ट कानूनी दांव-पेंच में उलझता जा रहा है। राज्यपाल लालजी टंडन मुख्यमंत्री कार्यालय को बार-बार निर्देश दे रहे हैं कि सरकार फ्लोर टेस्ट की प्रक्रिया को संपन्न कराए, लेकिन कमलनाथ सरकार इसे टालना चाहती है। सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने बजट सत्र शुरू होते ही कोरोनावायरस की आड़ लेकर सदन की कार्यवाही 26 मार्च तक स्थगित कर दी। स्पीकर प्रजापति ने कहा कि जब तक बेंगलुरु गए 16 विधायक वापस नहीं आएंगे, तब तक बहुमत परीक्षण कैसे होगा।
मध्य प्रदेश में जारी सियासी घटनाक्रम ने पिछले साल जुलाई में कर्नाटक विधानसभा में करीब एक महीने तक चले नाटक की याद ताजा करा दी है। इसकी शुरुआती झलक भी दिखनी शुरू हो गई है। जानकारों की मानें तो मध्य प्रदेश में भी फ्लोर टेस्ट की प्रक्रिया कर्नाटक जितनी ही लंबी खिच सकती है। कर्नाटक में फ्लोर टेस्ट से पहले चार दिन तक विधानसभा में चर्चा हुई थी। मध्य प्रदेश में भी कमलनाथ सरकार फ्लोर टेस्ट से पहले बजट पेश करना चाह रही है। ऐसे में यदि 27 मार्च को विधानसभा की कार्यवाही शुरू भी होती है तो सरकार सबसे पहले बजट पेश करेगी, फिर उस पर तीन से चार दिन तक चर्चा कर सकती है।
मध्य प्रदेश में कब क्या हुआ
1- बागी विधायक दो बार विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा भेज चुके: 10 मार्च को होली के दिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक 22 विधायक बेंगलुरु चले गए। यहीं से उन्होंने भाजपा नेता भूपेंद्र सिंह के हाथों अपने इस्तीफे भेजे, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इन्हें स्वीकार नहीं किया। इस बीच कमलनाथ सरकार ने सिंधिया गुट के छह मंत्रियों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। रविवार को कांग्रेस के 16 विधायकों ने दोबारा अलग-अलग पत्र भेजकर इस्तीफे स्वीकार करने की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने कोई उत्तर नहीं दिया।
2- राज्यपाल लालजी टंडन दो बार मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके हैं: राज्यपाल लालजी टंडन कमलनाथ सरकार को फ्लोर टेस्ट करवाने के लिए दो बार पत्र लिख चुके हैं। उन्होंने शनिवार रात सीएम को भेजे पत्र में लिखा था कि अभिभाषण के तुरंत बाद विश्वासमत पर मत विभाजन करवाएं। इसके लिए सदन में बटन का इस्तेमाल किया जाए। इस पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने जवाब दिया कि विधानसभा में बटन की सुविधा नहीं है। रविवार को राज्यपाल ने दोबारा पत्र लिखकर कहा कि बजट सत्र के पहले ही दिन बहुमत परीक्षण हो, क्योंकि सरकार अल्पमत में है, यह प्रक्रिया हाथ उठाकर संपन्न हो। लेकिन सोमवार को सदन की कार्यसूची में इस बात जिक्र नहीं किया गया।
3- मुख्यमंत्री कमलनाथ भी दो बार राज्यपाल से मिल चुके हैं: मुख्यमंत्री कमलनाथ ने रविवार देर रात राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात की। राजभवन से देर रात बाहर आते हुए कमलनाथ ने कहा कि राज्यपाल ने उन्हें चर्चा के लिए बुलाया था। कमलनाथ ने राज्यपाल को लिखे एक पत्र में भी कहा कि मौजूदा स्थिति में फ्लोर टेस्ट कराना संभव नहीं है। क्योंकि सदन में बहुमत परीक्षण कराना अलोकतांत्रिक है।
कर्नाटक में कब क्या हुआ था
1-1 जुलाई 2019 से शुरू हुआ था कर्नाटक में राजनीतिक संकट
तत्कालीन मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने 116 विधायकों के समर्थन से 14 महीने जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार चलाई थी। एक जुलाई को दो विधायकों ने इस्तीफा दिया। इसके बाद इस्तीफों की संख्या 15 हो गई। दो अन्य निर्दलीय विधायकों ने भी सरकार से समर्थन वापस ले लिया। सभी बागी विधायक मुंबई और गोवा चले गए थे।
2- इस्तीफों के बाद फ्लोर टेस्ट की तारीख तय हुई
विधायकों के इस्तीफे के बाद कर्नाटक में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हुआ। कांग्रेस-जेडीएस ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त के लिए ऑपरेशन लोटस चलाने का आरोप लगाया था। इस्तीफों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अदालत ने स्पीकर को इन पर जल्द फैसला लेने के निर्देश दिए। इसके बाद स्पीकर ने विश्वास मत साबित करने के लिए 18 जुलाई की तारीख तय की थी।
3- चार दिन चर्चा, तीन डेडलाइन बीतने के बाद हुआ था फ्लोर टेस्ट
कर्नाटक में विश्वास मत पर 4 दिन तक चर्चा हुई। राज्यपाल ने दो बार डेडलाइन दी, लेकिन फ्लोर टेस्ट नहीं हो सका। इसके बाद स्पीकर ने भी डेडलाइन दी, लेकिन तय समयसीमा के भीतर फ्लोर टेस्ट नहीं हुआ। आखिरकार चौथे दिन कुमारस्वामी फ्लोर टेस्ट में फेल हुए थे।
भाजपा नहीं चाहती है कि कमलनाथ सरकार के अधीन हो राज्यसभा चुनाव
भाजपा इस मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर पहुंच गई है, क्योंकि 26 मार्च को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना है और भाजपा नहीं चाहती कि चुनाव कमलनाथ सरकार के अधीन संपन्न हों। भाजपा नेताओं ने इसकी तैयारी पहले शुरू कर दी थी। वे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस पूरे घटनाक्रम पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
सदन की कार्यवाही में विधानसभा अध्यक्ष का फैसला ही अंतिम
कानूनी जानकारों का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 175 (2) के तहत राज्यपाल सरकार को संदेश भेज सकते हैं। सदन उस पर विचार कर सकता है, लेकिन सदन की कार्यवाही में विधानसभा अध्यक्ष का फैसला ही अंतिम होता है। कब क्या कार्यवाही होगी यह विधानसभा अध्यक्ष ही तय कर सकते हैं। सदन में फ्लोर टेस्ट कब होगा, यह विधानसभा अध्यक्ष ही तय करेंगे।