नागरिकता संशोधन कानून पर देशभर में हो रहा बवाल

नागरिकता संशोधन कानून पर देशभर में हो रहा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। पूर्वोत्तर राज्यों से शुरू हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला धीरे-धीरे देश के कई राज्यों में फैल चुका है। कानून के विरोध में अबतक कई राज्यों में हिंसक विरोध और आगजनी की घटनाएं हो चुकी हैं। मंगलवार को दिल्ली के सीलमपुर और जाफराबाद इलाके में हिंसक प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव और आगजनी की। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। हालात देखते हुए 5 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए। इससे पहले रविवार को शहर के जामिया इलाके में हिंसक प्रदर्शन हुए थे।


कानून का विरोध करने वाले लोग कई शहरों में सार्वजनिक और निजी संपत्ति को जमकर नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस दौरान वे सड़क पर चल रही बसों और निजी गाड़ियों को भी आग लगा रहे हैं। पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में तो उन्होंने रेल्वे स्टेशनों और ट्रेनों में भी आग लगाने की कोशिश की। पूर्वोत्तर के असम, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों के अलावा प.बंगाल, तमिलनाडु, केरल, यूपी, बिहार, दिल्ली, और तेलंगाना में हिंसक प्रदर्शन हो चुके हैं।


पूर्वोत्तर


इस कानून के विरोध का सिलसिला पूर्वोत्तर के पांच राज्यों से शुरू हुआ, जो जल्द ही अन्य राज्यों में भी फैल गया। इस दौरान असम, त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय और मिजोरम जैसे राज्यों में लोगों ने सड़क पर उतरकर कानून के प्रति अपना विरोध जताया। लोगों ने इसके लिए हिंसा का सहारा लेते हुए सड़क से गुजर रहे वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की और सार्वजनिक संपत्तियों को भी खूब नुकसान पहुंचाया। कई इलाकों में आगजनी भी की गई। लूटपाट और हिंसा के बाद कई जिलों में कर्फ्यू लगाना पड़ा। लेकिन सेना की तैनाती के बावजूद गुवाहाटी में कर्फ्यू तोड़ हजारों लोग सड़कों पर उतरे। असम में उपद्रवियों पर पुलिस फायरिंग में 3 लोगों की मौत हो गई। इन राज्यों के कई जिलों में एहतियातन इंटरनेट बंद करना पड़ा। असम में जारी आंदोलन और व्यापक प्रदर्शन के मद्देनजर पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने लंबी दूरी की 47 ट्रेनों का संचालन 13 से 19 दिसम्बर की अवधि में स्थगित कर दिया।


पश्चिम बंगाल


नागरिकता कानून के विरोध में राज्य में हुई हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सबसे ज्यादा नुकसान रेलवे की संपत्ति को पहुंचाया। सबसे ज्यादा असर मुर्शिदाबाद, मालदा, बेलदांगा, नदिया, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और ग्रामीण हावड़ा जिलों में दिखा। प्रदर्शनकारियों मुर्शिदाबाद के कृष्णपुर स्टेशन पर कई रेलगाड़ियों को आग लगा दी, तो वहीं लालगोला स्टेशन पर रेल पटरियों को उखाड़ दिया। प्रदर्शनकारियों ने बेलदांगा, उलुबेरिया, सुजनीपारा, हरिशचंद्रपुर, संकरेल रेलवे स्टेशनों पर भी तोड़फोड़ करते हुए पटरियों को नुकसान पहुंचाते हुए आगजनी की। इसके अलावा बेलदांगा में राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित कर टायरों में आग लगा दी और एंबुलेंस समेत अन्य वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कई जिलों में सड़क परिवहन बाधित रहा। कोना एक्सप्रेस वे पर भी  25 से ज्यादा बसों को फूंक दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने मालदा और मुर्शिदाबाद में भी कई बसों में आग के हवाले किया। 


उत्तर प्रदेश


इस कानून के विरोध के लिए राज्य के कई शहरों में लोग सड़क पर उतर आए। इस दौरान अलीगढ़, कानपुर, वाराणसी, लखनऊ, मऊ समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए। विरोध कर रहे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र हिंसा पर उतारू हो गए और पुलिस पर पथराव करने लगे। जिसके बाद पुलिस को आंसूगैस की मदद से उन्हें हटाना पड़ा। इस घटना के बाद अलीगढ़, सहारनपुर और मेरठ में इंटरनेट सेवाएं एहतियातन बंद कर दी गईं। मऊ में सोमवार को उपद्रवियों ने 12 वाहन और एक थाना फूंक दिया साथ ही पुलिस पर पथराव भी किया। जिसके बाद शहर के कुछ इलाकों में एहतियातन कर्फ्यू लगाना पड़ा। हिंसा की आशंका को देखते हुए उत्तरप्रदेश के सभी 75 जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई। उधर लखनऊ के नदवतुल उलमा (नदवा) और इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में भी विरोध कर रहे छात्रों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। 


दिल्ली


यहां जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के पास रविवार को उपद्रवी भीड़ ने 8 वाहन फूंक दिए थे और पथराव किया था। उपद्रवियों को खदेड़ते हुए पुलिस यूनिवर्सिटी में घुस गई थी। लाइब्रेरी और बाथरूम में घुसकर तोड़फोड़ और लाठीचार्ज कर छात्रों को बाहर निकाला। वहीं मंगलवार को सीलमपुर और जाफराबाद इलाके में हिंसक प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव और आगजनी की। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। हालात देखते हुए 5 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए। इससे पहले शुक्रवार को जामिया के छात्रों के हिंसक प्रदर्शन के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने शनिवार को परीक्षा स्थगित करते हुए 5 जनवरी तक छुट्‌टी घोषित कर दी थी। 


बिहार


पटना में सीएए के विरोध में निकले जुलूस में शामिल लोगों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान उग्र भीड़ ने पुलिस पोस्ट में आग लगा दी और वहां खड़े वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया। जिनमें मीडियाकर्मियों के भी कई वाहन शामिल थे। पथराव में लगभग एक दर्जन पुलिसकर्मियों को चोट पहुंची। 


दक्षिण भारत


इस कानून के विरोध में केरल में भी विभिन्न राजनीतिक दलों और 30 से ज्यादा मुस्लिम संगठनों और छात्रों ने रैलियां निकालीं। इस दौरान कई जगहों पर ट्रेनें रोकी गईं साथ ही वाहनों पर पथराव करने के अलावा बसों में भी तोड़फोड़ की गई। जिसके बाद 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में ले लिया गया। राज्य के कन्नूर, कोझिकोड, पलक्कड़, वायनाड और अलुवा में विरोध प्रदर्शन का ज्यादा असर दिखा। इसके अलावा तमिलनाडु में आईआईटी मद्रास के साथ ही लोयोला कॉलेज और तिरवरूर के केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रों ने प्रदर्शन किए। तेलंगाना में मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय और उस्मानिया विश्वविद्यालय समेत अनेक संस्थानों के सैकड़ों विद्यार्थियों ने परिसरों में धरना दिया। पुडुचेरी में पांडिचेरी विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी कक्षाओं का बहिष्कार कर प्रदर्शन किया।